राशन कार्ड ई-केवाईसी में बदलाव: आइरिश स्कैन की सुविधा शुरू
भारत सरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब तक सिर्फ अंगूठे के निशान से ई-केवाईसी होती थी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों और किसानों के अंगूठे की रेखाएं मिट जाने के कारण कई लोगों को समस्या हो रही थी। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने आइरिश स्कैन (Iris Scan) के माध्यम से भी ई-केवाईसी कराने की सुविधा शुरू की है।
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आइरिश स्कैन की सुविधा:
- आइरिश स्कैन एक बायोमेट्रिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति की आंखों की रेटिना और आइरिश स्कैन की जाती है। यह तकनीक अंगूठे के निशान से अधिक सटीक और सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि आंखों का पैटर्न जीवनभर नहीं बदलता।
- ई-पास मशीनों में नया अपडेट: सरकार द्वारा ई-पास मशीनों को नई प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे कोटेदार अब आसानी से आइरिश स्कैन के जरिए ई-केवाईसी कर सकेंगे।
लाभ:
- मजदूर वर्ग को राहत: जिन लोगों के अंगूठे के निशान घिस चुके हैं, उन्हें अब आइरिश स्कैन से ई-केवाईसी की सुविधा मिलेगी।
- ई-केवाईसी प्रक्रिया तेज होगी: आइरिश स्कैन से ई-केवाईसी प्रक्रिया और तेज हो जाएगी, जिससे राशन वितरण में देरी नहीं होगी।
- गरीब और मजदूर वर्ग को लाभ: इस सुविधा से गरीब और मजदूर वर्ग को राहत मिलेगी, जिन्हें अंगूठे के निशान के कारण दिक्कत हो रही थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
- आइरिश स्कैन क्या है और यह कैसे काम करता है?
आइरिश स्कैन एक बायोमेट्रिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति की आंखों की रेटिना और आइरिश स्कैन की जाती है। यह तकनीक अंगूठे के निशान से अधिक सटीक और सुरक्षित मानी जाती है। - आइरिश स्कैन की सुविधा क्यों शुरू की गई?
आइरिश स्कैन की सुविधा उन लोगों के लिए शुरू की गई है जिनके अंगूठे के निशान मिट चुके हैं और जिन्हें ई-केवाईसी में दिक्कत हो रही थी। - ई-केवाईसी की अंतिम तिथि क्या है?
राशन कार्ड ई-केवाईसी की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 है, जिसे पहले 31 दिसंबर 2024 निर्धारित की गई थी.